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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #34 • राग: Raag Gauri

शब्द 34 — शब्द 34: फुंरंग फुंहारे कृष्णी माया

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—फुंरंग फुंहारे कृष्णी माया, घण बरसंतां सरवर नीरे। तिरी तिरन्तै तीर, जे तिस मरै तो मरियूं। अण्णों धणों दूध दहींयूं, घीऊं मेऊं टेऊं जे लाभंता, भूख मरै तो जीवन ही बिन सरियूं। खेत मुक्त ले कृष्णौं अर्थीं, जे कंध हरे तो हरियूं। विष्णु जंपता जीव जु थाकै, तो जीवड़ियां बिन सरियूं। हरि हरि करतां हरकत आवै, तो न पछतावो करियूं। भीखी लो भीखियारी लो जे आदि परम तत लाधो। जाके बाद विराम विरांसो सांसो, ताने कौन कहिस साल्हिया साधो।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
यह संसार परिवर्तनशील है और जीवन की आवश्यकताएँ भी निरंतर बदलती रहती हैं। भोजन, खेत, जीवन और शरीर—सब प्रकृति के चक्र का हिस्सा हैं। मनुष्य को अपने जीवन का उद्देश्य पहचानना चाहिए। परम तत्व की खोज करने वाला साधक संसार की क्षणभंगुरता को समझता है और जीवन के अंतिम पड़ाव से पहले सत्य को प्राप्त करने का प्रयास करता है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
The world is constantly changing, and the conditions that sustain life are also part of nature's continuing cycle. Food, fields, life and the body all participate in this impermanent process. A person should recognize the purpose of life. The seeker who searches for the ultimate Reality understands worldly impermanence and seeks truth before life's final stage arrives.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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