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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #31 • राग: Raag Gauri

शब्द 31 — शब्द 31: भल मूल सींचो रे प्राणी

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—भल मूल सींचो रे प्राणी, ज्यूं का भल बुद्धि पावै। जामण मरण भव काल जु चूके, तो आवागवण न आवै। भल मूल सींचो रे प्राणी, ज्यूं तरवर मेलत डालूं। हरि परि हरि की आण न मानी, झंखा झूल्या आलूं। देवा सेवा टेव न जाणी, न बंध्या जम कालूं। भूले प्राणी विष्णु न जंप्यो, मूल न खोज्यो, फिर-फिर जोया डालूं। बिन ऐणायार हीरे नीरे, नग न सीपे तके न खोला नालूं। चलन चलते, बास बसंते, जीव जिवंते, सांस फुरंते, काया निवंती, कांय रे प्राणी विष्णु न धाती भालूं। घड़ी घटंतर पहर पटंतर, रात दिनंतर, मास पखंतर, क्षिण ओल्हरबा कालूं। मीठा झूठा मोह बिंबण, मकर समाया जालूं। कबहूं को बाइंदो बाजत लोई, पगड़िया मस्तक तालूं। जीवां जूणी पड़ै परासा, ज्यूं झींवर मच्छा जालूं। पहले जिवड़ो चेध्यो नाहीं, अब ऊंडी पड़ी पहारूं। जीव र पिंड बिछोड़ो होयसी, ता दिन थाक रहै सिर मारूं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
जैसे वृक्ष को स्वस्थ रखने के लिए उसकी जड़ों को सींचना आवश्यक है, वैसे ही मनुष्य को अपने जीवन के मूल—सत्य, सद्बुद्धि और धर्म—को मजबूत करना चाहिए। जीवन निरंतर बीत रहा है। जन्म, मृत्यु, दिन-रात और समय का चक्र चलता रहता है। संसार का मोह मनुष्य को अपने जाल में बाँधता है, लेकिन मृत्यु के समय शरीर और जीव का संबंध समाप्त हो जाता है। इसलिए जीवन रहते हुए मूल सत्य को पहचानना और सही मार्ग अपनाना आवश्यक है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
Just as a tree must be nourished at its roots, a person must strengthen the roots of life—truth, wisdom and righteous conduct. Life continually passes through birth, death, day and night. Worldly attachment can trap a person like a net, but at death the connection between the embodied being and the body comes to an end. Therefore, one should recognize the fundamental truth and follow the righteous path while there is still time.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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