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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #22 • राग: Raag Dhanasari

शब्द 22 — शब्द 22: लो लो रे राजिंदर रायों

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—लो लो रे राजिंदर रायों, बाजै बाव सुवायों, आभै अमी झुरायों। कालर करसण कीयां, नेपे कछु न कायों। अइया उत्तम खेती, को को इमृत रायों। को को दाख दिखायों, को को ईख उपायों। को को नींब निबोली, को को ढाक ढकोली। को को तूषण तूंषण बेलीं, को को आक अकायों, को को कछु कमायों। ताकां मूल कुमूलूं, डाल कुडालूं, ताकां पात कुपातूं, ताकां फल बीज कुबीजूं, तो नीर दोष किसायों। क्यों क्यों भूपभागे ऊंगा, क्यों क्यों कर्म विहूंगा। को को चिड़ी चमड़ी, को को उल्लू आयों। ताकै ज्ञान न जोती, मोक्ष न मुक्ति। याके कर्म इसायों, तो नीरे दोष किसायों।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
यहाँ खेती और पेड़-पौधों के उदाहरण द्वारा कर्म और उसके परिणाम का संबंध समझाया गया है। जिस प्रकार अलग-अलग बीज, जड़, शाखा, पत्ते और फल अपनी प्रकृति के अनुसार परिणाम देते हैं, उसी प्रकार मनुष्य के कर्म भी परिणाम उत्पन्न करते हैं। यदि कर्म ही गलत हैं तो केवल बाहरी परिस्थितियों को दोष देना उचित नहीं है। ज्ञान के अभाव में मनुष्य अपने कर्मों के परिणाम को समझ नहीं पाता।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
Using the imagery of agriculture and plants, this Shabd reflects upon the relationship between actions and their consequences. Just as different roots, branches, leaves, seeds and fruits produce results according to their nature, human actions also produce corresponding consequences. When one's actions are wrong, merely blaming external circumstances is not sufficient. Without wisdom, a person may fail to understand the consequences of their own actions.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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