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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
✦ शब्दवाणी संग्रह 🏛️ C9.2.1 Authority Corpus Shabad #14 • राग: Raag Ramkali

शब्द 14 — शब्द 14: मोरा उपख्यान वेदूं

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान मुखारविंद से उच्चरित पावन वाणी • 120 अमृत शबद

ॐ

✦ मूल शब्दवाणी (अपरिवर्तनीय मूल पाठ • Sacred & Untouched)

ओ३म्—मोरा उपख्यान वेदूं, कूंण तंत भेंदूं, शास्त्रे पुस्तके लिखणा न जाई। मेरा शब्द खोजो, ज्यूं शब्दे शब्द समाई। हिरणा दोह क्यूं हिरण हतलीं, कृष्ण चरित बिन क्यूं बाघ विडारत गाई। सुनही सुनहा का जाया, मुर्दा बघेरी बघेरा न होयबा, कृष्ण चरित बिन। सींचाण कबहूं न सुजीऊं। खर का शब्द न मधुरी बाणी, कृष्ण चरित बिन, ज्ञान न कबहूं गहींरूं। मुंडी का जाया, मुंडा न होयबा, कृष्ण चरित बिन, रीछां कबहूं न सुचीलूं। बिल्ली की इंद्री संतोष न होयबा, कृष्ण चरित बिन, काफरा न होयबा लींलूं। मुरगी का जाया मोरा न होयबा, कृष्ण चरित बिन, भाकला न होयबा चीरूं। दंत बिवाई जन्म न आई, कृष्ण चरित बिन, लोहे पड़े न काठ की सूळूं। नींबड़िये नारेल न होयबा, कृष्ण चरित बिन, छिलरे न होयबा हीरूं। तूंवण नागर बेल न होयबा, कृष्ण चरित बिन, बावली न केली केलूं। गऊ का जाया खगा न होयबा, कृष्ण चरित बिन, दया न पालतो भीलूं। सूरी का जाया हस्ती न होयबा, कृष्ण चरित बिन, ओछा कबहीं न पूरूं। कागण का जाया कोकला न होयबा, कृष्ण चरित बिन, बुगली न जनिबा हंसूं। ज्ञानी कै हृदय प्रमोद आवत, अज्ञानी लागत डांसूं।

हिन्दी भावार्थ

भावार्थ — समझने हेतु व्याख्या
यह शब्द ज्ञान की गहराई और गुरु-वाणी के महत्व की ओर संकेत करता है। केवल पुस्तकों और शास्त्रों में लिखे हुए ज्ञान को जान लेना पर्याप्त नहीं; वास्तविक ज्ञान को अनुभव और आचरण में उतारना आवश्यक है। 'कृष्ण चरित' का संदर्भ यहाँ उस आदर्श आचरण/दिव्य चरित्र की ओर संकेत करता है, जिसके बिना केवल बाहरी रूप या नाम वास्तविक परिवर्तन नहीं ला सकते। ज्ञानी व्यक्ति इस सत्य को समझकर आनंद प्राप्त करता है, जबकि अज्ञानी बाहरी रूपों में उलझा रहता है।

English Translation

Interpretive Rendering & Meaning
This Shabd points toward the depth of spiritual knowledge and the importance of the Guru's word. Merely knowing what is written in books and scriptures is not sufficient; true knowledge must be experienced and reflected in conduct. The reference to “Krishna Charit” points toward the ideal spiritual character and conduct through which knowledge becomes meaningful. The wise recognize this truth, while the ignorant remain caught in external appearances.
✦ मुख्य संदेश (Key Message Takeaway)

स्रोत व संपादकीय विवरण (Source & Editorial Information)

✓ C9.2.1 Provenance Verified
प्रामाणिक स्रोत (Source):
संस्करण / पृष्ठ (Edition/Page):
समीक्षक (Reviewed By):
प्रकाशन स्थिति (Status):
महत्वपूर्ण सूचना व अस्वीकरण (Heritage Disclaimer)

मूल शब्दवाणी को यथासंभव मूल स्रोत के अनुसार संरक्षित किया गया है। हिन्दी भावार्थ और English Translation पाठकों की समझ के लिए प्रस्तुत व्याख्यात्मक सामग्री हैं और मूल शब्दवाणी का स्थान नहीं लेते।

The original Shabd Vani is preserved according to the referenced source as closely as possible. The Hindi meaning and English translation are provided as interpretive aids for readers and do not replace the original text.

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