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विश्नोई एटलस
विश्नोई एटलस धरोहर की खोज • विरासत का संरक्षण
सम्वत् 1542 (1485 ई.) — श्री गुरु जाम्भोजी द्वारा प्रवर्तित
"सिर सांटे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण"
विश्नोई एटलस परंपरा • प्रकृति • प्राणी • संस्कृति

धरोहर की खोज। विरासत का संरक्षण। — विश्व विश्नोई समाज आधिकारिक डिजिटल एटलस

प्रकृति, वन्यजीव और मानवीय मर्यादाओं को समर्पित 540+ वर्षों की पावन परंपरा। गुरु जाम्भोजी महाराज के 29 पावन नियम, 120 शब्द वाणी, 1730 का खेजड़ली 363 अमर बलिदान एवं प्रमाणित 179 ग्रामीण बस्तियों का आधिकारिक अभिलेखागार।

179 प्रमाणित गांव
29 पावन नियम
120 शब्द वाणी
363 खेजड़ली शहीद
प्रमाणित गांव
179 प्रमाणित
6 राज्यों में
पावन अष्टधाम
8 मुख्य धाम
52 कुल तीर्थ स्थल
उनतीस नियम
29 1485 AD
आचार संहिता
खेजड़ली शहीद
363 1730 AD
अमर वृक्ष रक्षक
शब्द वाणी
120 अमृत शब्द
गुरु जाम्भोजी
प्रमाणित विभूतियां
31 शोधित
60 संत कवि
धरोहर सूत्र — ऐतिहासिक व आध्यात्मिक यात्रा
1 गुरु जाम्भोजी 1451–1536
2 29 नियम 1485 AD
3 शब्द वाणी 120 Verses
4 खेजड़ली 1730 363 Martyrs
5 जीव रक्षा Blackbucks
6 ग्राम एटलस 179 Villages
ऐतिहासिक व सांस्कृतिक पहचान

विश्नोई समाज: प्रकृति एवं सत्य का संवाहक

विश्नोई समुदाय की स्थापना कार्तिक शुक्ला अष्टमी, वि.सं. 1542 (1485 ई.) में राजस्थान के समराथल धोरा पर श्री गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा की गई थी। "बीस-नोई" (20 + 9 = 29) नाम गुरु जाम्भोजी द्वारा प्रवर्तित 29 पावन जीवन-नियमों से उद्भूत है, जिसमें वृक्ष रक्षा, जीव दया, व्यक्तिगत शुचिता, सत्य, एवं परोपकार का समन्वय है। इसी परंपरा के अंतर्गत 1730 ई. में खेजड़ली में हरे वृक्षों की रक्षा हेतु 363 विश्नोई स्त्री-पुरुषों ने अपने प्राण अर्पित किए।

29 नियम 1485 ई.
"बीस + नौ = विश्नोई"
सार्वकालिक आचार संहिता

उनतीस पावन नियम — चतुर्विध जीवन दर्शन

🪷

सदाचार व व्यक्तिगत शुचिता

प्रातः स्नान, अंतःकरण की शुचिता, सत्य भाषण, संतोष, क्षमा और ब्रह्मचर्य मर्यादा का दैनिक पालन।

🦌

करुणा, अहिंसा व जीव दया

जीव दया पालणी (नियम 18), मूक पशुओं को अभयदान, बैल आदि को बध्या न करना और अहिंसा व्रत।

🌿

प्रकृति व वनस्पति संरक्षण

रूंख लीलो नी घावे (नियम 19 — हरे वृक्ष न काटना), खेजड़ी संवर्धन और जैव-विविधता का सम्मान।

🤝

सामाजिक दायित्व व लोक कल्याण

साझा चूल्हा, परोपकार, व्यसन मुक्ति (मद्य, भांग, तंबाकू निषेध), और सामाजिक समरसता।

धरोहर के मुख्य आधार

पंच महाधरोहर स्तंभ

🕉️

श्री गुरु जाम्भोजी (1451–1536 ई.)

पीपासर में जन्म, समराथल धोरा पर तपस्या और 1485 ई. में विश्नोई पंथ का प्रवर्तन। आपने प्रकृति और मानव कल्याण के लिए 29 नियमों की वैज्ञानिक संहिता प्रदान की।

जीवन चरित्र पढ़ें →
📜

29 पावन नियम (उनतीस नियम)

जीव दया पालणी (नियम 18) और रूंख लीलो नी घावे (नियम 19) सहित स्वास्थ्य, शुचिता और सामाजिक समरसता की सार्वकालिक आचार संहिता।

29 नियम देवनागरी में →
📖

पावन शब्द वाणी (120 शब्द)

गुरु जाम्भोजी महाराज के मुखारविंद से उच्चरित 120 पावन अमृत शब्द। ब्रह्म ज्ञान, सृष्टि रचना और पर्यावरण संरक्षण का परम प्रामाणिक ग्रंथ।

शब्द वाणी पाठ →
🌳

खेजड़ली अमर बलिदान (1730 ई.)

माता अमृता देवी एवं 362 विश्नोई वीरों ने खेजड़ी वृक्षों की रक्षार्थ सिर कटवा लिए। ऐतिहासिक राजकीय आदेश एवं आधुनिक चिपको आंदोलन की ऐतिहासिक प्रेरणा।

363 शहीदों की नामावली →
🦌

जीव रक्षा व पर्यावरण परंपरा

चिंकारा, काले हिरण (कृष्णमृग), राज्य पक्षी गोडावण और खेजड़ी वृक्षों का 500 वर्षों से निस्वार्थ संरक्षण। ग्रामीण विश्नोई बस्तियों में वन्यजीव निर्भय विचरण करते हैं।

संरक्षण परंपरा इतिहास →
🌳 अहिंसक पर्यावरण आत्मोत्सर्ग

खेजड़ली 1730 — अमर 363 वृक्ष शहीदों का पावन स्मरण

भाद्रपद शुक्ला दशमी, वि.सं. 1787 (1730 ई.) को जोधपुर नरेश के आदेश पर चूने के भट्ठों के लिए खेजड़ली गांव के हरे खेजड़ी वृक्ष काटने आए सैनिकों के समक्ष माता अमृता देवी विश्नोई, उनकी तीन पुत्रियों और 363 वीरों ने वृक्षों से लिपटकर प्राणोत्सर्ग कर दिया।

🌿 01 • कल्पवृक्ष

पवित्र खेजड़ी वृक्ष

मरुस्थल की जीवन रेखा, छाया, चारा व ऑक्सीजन का स्रोत। नियम 19 के तहत हरा वृक्ष काटना पूर्णतः वर्जित।

⚔️ 02 • 1730 ई.

खेजड़ली गांव

जोधपुर दरबार के सैनिकों के कुल्हाड़े के समक्ष विश्नोई वीरों का अहिंसक, अडिग व शांतिपूर्ण सत्याग्रह।

🌸 03 • अमृता देवी

माता अमृता देवी

"सिर सांटे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण" — वृक्ष से लिपटकर प्रथम बलिदान देने वाली अमर वीरांगना।

🕊️ 04 • अमर शहीद

363 अमर वृक्ष शहीद

294 पुरुष एवं 69 नारियां। जोधपुर नरेश का पश्चाताप और खेजड़ी वृक्ष व वन्यजीव शिकार पर ताम्रपत्र प्रतिबंध।

* 363 शहीदों की नामावली ऐतिहासिक गजेटियर व ताम्रपत्र अभिलेखों द्वारा साक्ष्य-प्रमाणित है। खेजड़ली स्मारक एवं नामावली देखें →
प्रमाणित ग्रामीण एटलस

विश्नोई ग्राम एटलस — 179 प्रमाणित गांव

भारत की 2011 जनगणना MDDS कोड, आधिकारिक तहसील पदानुक्रम और अभिलेखीय साक्ष्य से सत्यापित 179 गांव। (47,453 अप्रमाणित प्रविष्टियां सख्त क्वारंटीन में सुरक्षित हैं)।

Rajasthan: 120 Haryana: 24 Punjab: 21 Uttar Pradesh: 6 Madhya Pradesh: 4 Gujarat: 4
मुकाम (तालवा) Bikaner, Rajasthan
LEVEL A

मुकाम संपूर्ण विश्नोई समाज का सर्वोच्च व परम पावन केंद्रीय तीर्थ स्थल है जहाँ श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान की पावन समाधि (निज मंदिर) स्थित है। फाल्गुन व अश्विन अमावस्या को यहाँ विशाल लक्खी मेला भरता है जहाँ लाखों श्रद्धालु हवन व पाहल ग्रहण करते हैं।

पीपासर Nagaur, Rajasthan
LEVEL A

पीपासर श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का परम पावन प्राकट्य स्थल (जन्मभूमि) है। विक्रम संवत 1508 (1451 ई.) भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) की अर्धरात्रि को पूज्य पिता ठाकुर लोहट जी पंवार एवं माता हंसा देवी के गृह आपका अवतार हुआ। यहाँ चरण पादुका व जन्म स्थली मंदिर संपूर्ण समाज के लिए परम वंदनीय है।

समराथल धोरा Bikaner, Rajasthan
LEVEL A

समराथल धोरा विश्नोई धर्म की पावन उद्गम स्थली है। विक्रम संवत 1542 (1485 ई.) कार्तिक शुक्ला अष्टमी को गुरु जम्भेश्वर भगवान ने यहाँ पाहल बनाकर 29 नियमों के साथ विश्नोई पंथ की स्थापना की।

रोटू Nagaur, Rajasthan
LEVEL A

रोटू पावन तीर्थ धाम एवं विश्नोई समाज का अनुकरणीय वन्यजीव संरक्षण केंद्र है जहाँ गुरु जम्भेश्वर भगवान ने प्रवास किया। यह राजस्थान सरकार द्वारा अधिसूचित "रोटू कंजर्वेशन रिजर्व" है जहाँ कृष्णमृग (काले हिरण) घरों के आंगनों में निर्भय विचरण करते हैं।

लालासर Bikaner, Rajasthan
LEVEL A

लालासर साथरी गुरु जम्भेश्वर भगवान का परम पावन निर्वाण स्थल है जहाँ वि.सं. 1593 (1536 ई.) में गुरुदेव ने अपनी नश्वर देह त्याग कर परमधाम गमन किया।

गुड़ामालानी Barmer, Rajasthan
LEVEL A

गुड़ामालानी बाड़मेर जिले में विश्नोई समाज का वृहद सांस्कृतिक व सामाजिक केंद्र है। यहाँ की उपजाऊ कृषि, समाज सुधार आंदोलन एवं चिंकारा मृगों की निस्वार्थ रक्षा की परंपरा ऐतिहासिक है।

संत परंपरा एवं पवित्र पीठ

पावन अष्टधाम एवं जाम्भाणी संत-कवि

🛕 #1 Dham

दीन मठ एवं पावन कांकड़ वृक्ष (समराथल धोरा)

Bikaner

बिश्नोई पंथ की स्थापना (कार्तिक शुक्ल अष्टमी 1485 ई.), अमृतमय पाहुल संस्कार एवं 29 नियमों का उद्घोष

दर्शन मार्गदर्शिका →
🛕 #2 Dham

मुक्तिधाम मुकाम (निज मंदिर समाधि स्थल)

Bikaner

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का परम पावन समाधि स्थल; बिश्नोई समाज का सर्वोच्च महातीर्थ

दर्शन मार्गदर्शिका →
🛕 #3 Dham

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान प्राकट्य स्थल मंदिर

Nagaur

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान का प्राकट्य स्थल (जन्मभूमि भाद्रपद कृष्णा अष्टमी 1451 ई.)

दर्शन मार्गदर्शिका →
🛕 #4 Dham

जांगलू धाम एवं पावन सरोवर

Bikaner

गुरु जम्भेश्वर जी का पावन साधना स्थल, उपदेश पीठ एवं ऐतिहासिक जल सरोवर

दर्शन मार्गदर्शिका →
उल्लेखनीय समाज विभूतियां

सत्यापित समाज विभूतियां

संपूर्ण विभूति निर्देशिका देखें →
J judiciary

न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई

Judge, Supreme Court of India

संवैधानिक स्वतंत्रता, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता पर अनेक ऐतिहासिक निर्णय दिए। वे बिश्नोई समाज से भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचने वाले प्रथम न्यायविद हैं।

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I civil_services

आईएएस परी बिश्नोई

Indian Administrative Service Officer

प्रशासनिक पदों पर जनस्वास्थ्य, बालिका शिक्षा, और पारदर्शी ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य।

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G conservation

गंगा राम बिश्नोई

National Wildlife Protection Awardee (Posthumous)

हिरणों की रक्षा में शहादत; भारत सरकार द्वारा सामुदायिक वन्यजीव रक्षकों के राष्ट्रीय सम्मान की ऐतिहासिक शुरुआत का आधार बने।

विवरण पढ़ें →
R conservation

राधेश्याम पेमाणी बिश्नोई

Young Naturalist Awardee & Grassroots Conservationist

सैकड़ों घायल चिंकारा व पक्षियों का उपचार; गोडावण संरक्षण हेतु राष्ट्रीय स्तर पर आवाज़ उठाना; थार के युवाओं को वन्यजीव रक्षा में संगठित करना।

विवरण पढ़ें →
जाम्भाणी साहित्य भंडार

शब्द वाणी (120 शब्द) एवं संत साहित्य

गुरु जाम्भोजी महाराज द्वारा उच्चरित 120 पावन शब्दों का मूल देवनागरी पाठ, अन्वय एवं सरल भावार्थ। साथ ही संत वील्होजी, संत केशोजी और संत सूरजनजी के प्रामाणिक हरजस, साखी और कवित्त।

संस्थागत ढांचा

पंजीकृत संस्थाएं एवं गौशालाएं

सभी संस्थाएं देखें →
🏛️ प्रमाणित

All India Bishnoi Mahasabha

Mukam, Rajasthan

The supreme apex representative council and executive governing institution of the global Bishnoi community. Founded in 1911, the Mahasabha convenes at the holy sanctum of Mukam, governing institutional temple custody, educational foundations, legislative wildlife advocacy, and community welfare across India.

संस्था विवरण →
🏛️ प्रमाणित

Bishnoi Tiger Force

Jodhpur, Rajasthan

A registered grassroots environmental protection and anti-poaching youth force headquartered in Jodhpur. BTF maintains rapid-action volunteer units across western Rajasthan to intercept armed poachers and safeguard Blackbucks and Chinkaras.

संस्था विवरण →
🏛️ प्रमाणित

Akhil Bharatiya Jeev Raksha Bishnoi Sabha

Jodhpur, Rajasthan

The premier frontline wildlife defense and anti-poaching society of the Bishnoi community. Founded under the inspiration of Sant Kumar Ji Rahad, the Sabha actively patrols wildlife corridors, runs wildlife rescue squads, and fights landmark wildlife protection cases across India.

संस्था विवरण →
सामुदायिक आयोजन

आगामी मेले एवं कार्यक्रम

सभी आयोजन देखें →
17 Nov 2026

Bishnoi Dharma Sthapana & Pahal Diwas

कार्यक्रम विवरण →
02 Dec 2026

All India Bishnoi Youth Career & Civil Services Conclave

कार्यक्रम विवरण →
03 Dec 2026

Sri Guru Jambheshwar Bhagwan Nirvana Diwas (Lalasar)

कार्यक्रम विवरण →
🎙️ समाज की आवाजें एवं प्रमाणित अभिमत

सांस्कृतिक संस्मरण एवं जनअभिमत

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