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RPSC, REET, UPSC एवं बिश्नोई विद्वत शोध पीठ द्वारा सत्यापित प्रश्नों का अभ्यास करें। प्रत्येक प्रश्न के साथ विस्तृत उत्तर व विधिक संदर्भ उपलब्ध है।
श्री शब्द वाणी का पावन पद 1 ('शब्द 1: गुरू चीन्हों गुरू चीन्ह पुरोहित') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 1 (शब्द 1: गुरू चीन्हों गुरू चीन्ह पुरोहित) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ॐ गुरु जी, साचो परमेश्वर सरबेश्वर, तिन ही साजेया सकल जहान। ज...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 2 ('शब्द 2: मोरे छाया न माया') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 2 (शब्द 2: मोरे छाया न माया) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—मोरे छाया न माया, लोहू न मांसू, रतूँ न धातूँ। मोरे माई ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 3 ('शब्द 3: मोरे अंग न अलसी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 3 (शब्द 3: मोरे अंग न अलसी) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—मोरे अंग न अलसी, तेल न मलियो, ना परमल पीसियां। जीमत पीव...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 4 ('शब्द 4: जद पवन न होता') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 4 (शब्द 4: जद पवन न होता) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—जद पवन न होता, पाणी न होता, न होता धर गैंदारूं। चंदन न ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 5 ('शब्द 5: अइया लो अपरंपर बाणी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 5 (शब्द 5: अइया लो अपरंपर बाणी) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—अइया लो अपरंपर बाणी, म्हे जपां न जाया जीऊं। नवअवतार नमो...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 6 ('शब्द 6: भवन भवन म्हे एका जोती') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 6 (शब्द 6: भवन भवन म्हे एका जोती) विशुद्ध रूप से Raag Asavari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'जीव दया पालो रे संतो, साचो धरम विचार। जे कोई कापे तरुवर डारी...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 7 ('शब्द 7: हिंदू होय कै हरि क्यूं ना जंप्यो') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 7 (शब्द 7: हिंदू होय कै हरि क्यूं ना जंप्यो) विशुद्ध रूप से Raag Asavari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—हिंदू होय कै हरि क्यूं ना जंप्यो, कांय दहदिशा दिल परसरा...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 8 ('शब्द 8: सुण रे काजी, सुण रे मुल्ला') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 8 (शब्द 8: सुण रे काजी, सुण रे मुल्ला) विशुद्ध रूप से Raag Asavari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—सुण रे काजी, सुण रे मुल्ला, सुण रे बकर कसाई। किणरी थरपी...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 9 ('शब्द 9: दिल साबित हज काबो नेड़ो') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 9 (शब्द 9: दिल साबित हज काबो नेड़ो) विशुद्ध रूप से Raag Asavari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—दिल साबित हज काबो नेड़ो, क्या उलंबग पुकारो। भाई नाऊं बल...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 10 ('शब्द 10: बिस्मिल्ला रहमान रहीम') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 10 (शब्द 10: बिस्मिल्ला रहमान रहीम) विशुद्ध रूप से Raag Asavari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—बिस्मिल्ला रहमान रहीम, जिहिं कै सदकै भीना भीन। तो भेटील...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 11 ('शब्द 11: दिल साबित हज काबो नेड़ो (सीने सरवर)') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 11 (शब्द 11: दिल साबित हज काबो नेड़ो (सीने सरवर)) विशुद्ध रूप से Raag Ramkali में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—दिल साबित हज काबो नेड़ो, क्या उलंबग पुकारो। सीने सरवर क...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 12 ('शब्द 12: महंमद-महंमद न कर काजी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 12 (शब्द 12: महंमद-महंमद न कर काजी) विशुद्ध रूप से Raag Ramkali में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—महंमद-महंमद न कर काजी, महंमद का तो विषम विचारूं। महंमद ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 13 ('शब्द 13: कांयरे मुरखा, तैं जन्म गुमायों') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 13 (शब्द 13: कांयरे मुरखा, तैं जन्म गुमायों) विशुद्ध रूप से Raag Ramkali में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—कांयरे मुरखा, तैं जन्म गुमायों, भुंय भारी ले भारूं। जाद...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 14 ('शब्द 14: मोरा उपख्यान वेदूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 14 (शब्द 14: मोरा उपख्यान वेदूं) विशुद्ध रूप से Raag Ramkali में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—मोरा उपख्यान वेदूं, कूंण तंत भेंदूं, शास्त्रे पुस्तके ल...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 15 ('शब्द 15: सुरमा लेगण झीणां शब्दूं') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 15 (शब्द 15: सुरमा लेगण झीणां शब्दूं) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—सुरमा लेगण झीणां शब्दूं, म्हे भूल न भाख्या थूंलूं। सो प...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 16 ('शब्द 16: लोहे हंता कंचन घड़ियां') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 16 (शब्द 16: लोहे हंता कंचन घड़ियां) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—लोहे हंता कंचन घड़ियां, घड़ियां ठाम सुड़ाऊं। जातां हंता...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 17 ('शब्द 17: मोरे सहजै सुंदर, लोतर बाणी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 17 (शब्द 17: मोरे सहजै सुंदर, लोतर बाणी) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—मोरे सहजै सुंदर, लोतर बाणी, ऐसो भयो मन ज्ञानी। तइया सास...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 18 ('शब्द 18: जांकुंछ जांकुंछ, जां कछु न जाणी') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 18 (शब्द 18: जांकुंछ जांकुंछ, जां कछु न जाणी) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—जांकुंछ जांकुंछ, जां कछु न जाणी। नांकुंछ नांकुंछ, तां क...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 19 ('शब्द 19: रूप अरूप रमूं, पिंडे ब्रह्मांडे') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 19 (शब्द 19: रूप अरूप रमूं, पिंडे ब्रह्मांडे) विशुद्ध रूप से Raag Asa में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—रूप अरूप रमूं, पिंडे ब्रह्मांडे, घट घट अघट रहायों। अनंत...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 20 ('शब्द 20: जां जां दया न मया') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 20 (शब्द 20: जां जां दया न मया) विशुद्ध रूप से Raag Asa में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्—जां जां दया न मया, तां तां बिकरम कया। जां जां आव न वैंस...'