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RPSC, REET, UPSC एवं बिश्नोई विद्वत शोध पीठ द्वारा सत्यापित प्रश्नों का अभ्यास करें। प्रत्येक प्रश्न के साथ विस्तृत उत्तर व विधिक संदर्भ उपलब्ध है।
पद संख्या 42 ('शब्द 42: आयसा काहे काजे खेह भकरूड़े') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?
पद 42 (शब्द 42: आयसा काहे काजे खेह भकरूड़े, Raag Kedara) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।
पद संख्या 44 ('शब्द 44: खरतर झोली खरतर कंथा') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?
पद 44 (शब्द 44: खरतर झोली खरतर कंथा, Raag Kedara) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।
पद संख्या 46 ('शब्द 46: जिहिं जोगी के मनही मुद्रा') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?
पद 46 (शब्द 46: जिहिं जोगी के मनही मुद्रा, Raag Sorath) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।
पद संख्या 48 ('शब्द 48: लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?
पद 48 (शब्द 48: लक्ष्मण लक्ष्मण न कर आयसां, Raag Sorath) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।
पद संख्या 50 ('शब्द 50: तइया सांसू तइया मासूं') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?
पद 50 (शब्द 50: तइया सांसू तइया मासूं, Raag Sorath) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।
शब्द संख्या 52 ('शब्द 52: मोह मंडप थाप थाप ले') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 52 (शब्द 52: मोह मंडप थाप थाप ले, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 54 ('शब्द 54: अरुण विघाणीं रे रवि भाणै') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 54 (शब्द 54: अरुण विघाणीं रे रवि भाणै, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 56 ('शब्द 56: कुपाथ कूं दान जु दीयो') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 56 (शब्द 56: कुपाथ कूं दान जु दीयो, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 58 ('शब्द 58: तउवा माण दुर्योधन माण्या') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 58 (शब्द 58: तउवा माण दुर्योधन माण्या, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 60 ('शब्द 60: हस्ती चढ़ंता गेंवर गुड़ंता') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 60 (शब्द 60: हस्ती चढ़ंता गेंवर गुड़ंता, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 62 ('शब्द 62: नामै कारण किरिया चू यो,') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 62 (शब्द 62: नामै कारण किरिया चू यो,, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 64 ('शब्द 64: मैं कर भूला मांड पिराणी,') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 64 (शब्द 64: मैं कर भूला मांड पिराणी,, Raag Sorath) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 66 ('शब्द 66: ऊमाज गुमाज पंज गंज यारी') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 66 (शब्द 66: ऊमाज गुमाज पंज गंज यारी, Raag Bilawal) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 68 ('शब्द 68: वै कंवराई अनन्त बधाई') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 68 (शब्द 68: वै कंवराई अनन्त बधाई, Raag Maru) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 70 ('शब्द 70: हक हलालूं') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 70 (शब्द 70: हक हलालूं, Raag Kalyan) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 72 ('शब्द 72: वेद कुराण कुमाया जालूं') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 72 (शब्द 72: वेद कुराण कुमाया जालूं, Raag Todi) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 74 ('शब्द 74: कड़वा मीठा भोजन भख ले,') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 74 (शब्द 74: कड़वा मीठा भोजन भख ले,, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 76 ('शब्द 76: तन मन धोइये संजम हुइये,') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 76 (शब्द 76: तन मन धोइये संजम हुइये,, Raag Sorath) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 78 ('शब्द 78: नवै पोल नवै दरवाजा') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 78 (शब्द 78: नवै पोल नवै दरवाजा, Raag Bilawal) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।
शब्द संख्या 80 ('शब्द 80: जे म्हां सूता रैण बिहावै,') में प्रयुक्त दार्शनिक शब्दावली के अनुसार 'पाहल' और 'अभिमंत्रित जल' का क्या आध्यात्मिक प्रभाव बताया गया है?
पद 80 (शब्द 80: जे म्हां सूता रैण बिहावै,, Raag Maru) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: अंतःकरण की पवित्रता, पाप नाश एवं धर्म में दृढ़ता।