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Q-SHABD-002-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 2 ('शब्द 2: मोरे छाया न माया') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
B काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
C जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
D सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 2 (शब्द 2: मोरे छाया न माया, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-004-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 4 ('शब्द 4: जद पवन न होता') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
B गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
C सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
D जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 4 (शब्द 4: जद पवन न होता, Raag Bhairav) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-006-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 6 ('शब्द 6: भवन भवन म्हे एका जोती') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
B गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
C काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
D सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 6 (शब्द 6: भवन भवन म्हे एका जोती, Raag Asavari) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-008-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 8 ('शब्द 8: सुण रे काजी, सुण रे मुल्ला') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
B सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
C काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
D गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 8 (शब्द 8: सुण रे काजी, सुण रे मुल्ला, Raag Asavari) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-010-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 10 ('शब्द 10: बिस्मिल्ला रहमान रहीम') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
B काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
C जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
D गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 10 (शब्द 10: बिस्मिल्ला रहमान रहीम, Raag Asavari) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-012-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 12 ('शब्द 12: महंमद-महंमद न कर काजी') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
B जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
C सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
D गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 12 (शब्द 12: महंमद-महंमद न कर काजी, Raag Ramkali) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-014-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 14 ('शब्द 14: मोरा उपख्यान वेदूं') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
B काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
C जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
D सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 14 (शब्द 14: मोरा उपख्यान वेदूं, Raag Ramkali) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-016-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 16 ('शब्द 16: लोहे हंता कंचन घड़ियां') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
B सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
C काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
D गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 16 (शब्द 16: लोहे हंता कंचन घड़ियां, Raag Sorath) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-018-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 18 ('शब्द 18: जांकुंछ जांकुंछ, जां कछु न जाणी') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
B काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
C जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
D सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 18 (शब्द 18: जांकुंछ जांकुंछ, जां कछु न जाणी, Raag Sorath) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-020-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

शब्द वाणी के पद 20 ('शब्द 20: जां जां दया न मया') में गुरु जाम्भोजी ने साधक को किस अंतःकरण वृत्ति को त्यागने का निर्देश दिया है?

A सत्य वचन व ईश्वर भक्ति का त्याग
B काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग
C गुरु सेवा एवं सत्संग का त्याग
D जीव दया एवं अहिंसा का त्याग
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 20 (शब्द 20: जां जां दया न मया, Raag Asa) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: काम, क्रोध, मद, लोभ व मिथ्या अहंकार का त्याग।

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Q-SHABD-022-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 22 ('शब्द 22: लो लो रे राजिंदर रायों') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
B सांसारिक वैभव का विस्तार
C अंधविश्वास एवं पाखंड
D सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 22 (शब्द 22: लो लो रे राजिंदर रायों, Raag Dhanasari) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

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Q-SHABD-024-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 24 ('शब्द 24: आसण बैसण कूड़ कपटण') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
B केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
C अंधविश्वास एवं पाखंड
D सांसारिक वैभव का विस्तार
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 24 (शब्द 24: आसण बैसण कूड़ कपटण, Raag Dhanasari) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

कठिनाई: hard
Q-SHABD-026-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 26 ('शब्द 26: घण तण जीम्या, को गुण नाहीं') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
B सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
C अंधविश्वास एवं पाखंड
D सांसारिक वैभव का विस्तार
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 26 (शब्द 26: घण तण जीम्या, को गुण नाहीं, Raag Bilawal) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

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Q-SHABD-028-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 28 ('शब्द 28: मछली मच्छ फिरै जल भीतर') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
B सांसारिक वैभव का विस्तार
C अंधविश्वास एवं पाखंड
D केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 28 (शब्द 28: मछली मच्छ फिरै जल भीतर, Raag Bilawal) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

कठिनाई: hard
Q-SHABD-030-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 30 ('शब्द 30: कूं ची वाला शब्द (आयो हुंकारो जीवड़ो बुलायो)') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
B सांसारिक वैभव का विस्तार
C अंधविश्वास एवं पाखंड
D केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 30 (शब्द 30: कूं ची वाला शब्द (आयो हुंकारो जीवड़ो बुलायो), Raag Bilawal) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

कठिनाई: hard
Q-SHABD-032-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 32 ('शब्द 32: कोड़ गऊ जे तीरथ दानौं') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A सांसारिक वैभव का विस्तार
B सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
C केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
D अंधविश्वास एवं पाखंड
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 32 (शब्द 32: कोड़ गऊ जे तीरथ दानौं, Raag Gauri) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

कठिनाई: hard
Q-SHABD-034-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 34 ('शब्द 34: फुंरंग फुंहारे कृष्णी माया') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A अंधविश्वास एवं पाखंड
B केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
C सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
D सांसारिक वैभव का विस्तार
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 34 (शब्द 34: फुंरंग फुंहारे कृष्णी माया, Raag Gauri) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

कठिनाई: hard
Q-SHABD-036-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 36 ('शब्द 36: काजी कथै कुराणूं') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
B केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
C अंधविश्वास एवं पाखंड
D सांसारिक वैभव का विस्तार
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 36 (शब्द 36: काजी कथै कुराणूं, Raag Gauri) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

कठिनाई: hard
Q-SHABD-038-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 38 ('शब्द 38: रेरे पिंड स पिंडूं') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
B सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
C सांसारिक वैभव का विस्तार
D अंधविश्वास एवं पाखंड
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 38 (शब्द 38: रेरे पिंड स पिंडूं, Raag Gauri) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

कठिनाई: hard
Q-SHABD-040-C • विशिष्ट तत्व मीमांसा व आचार संहिता 🏛️ श्री शब्द वाणी (Shabd Vani)

पद संख्या 40 ('शब्द 40: सस पाताले तिहूं त्रिलोके') में वर्णित 'अमर पद' की प्राप्ति हेतु कौन सा साधन सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित है?

A सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान
B केवल शास्त्र वाचन बिना आचरण के
C अंधविश्वास एवं पाखंड
D सांसारिक वैभव का विस्तार
💡 विस्तृत व्याख्या:

पद 40 (शब्द 40: सस पाताले तिहूं त्रिलोके, Raag Gauri) में गुरु जाम्भोजी महाराज ने स्पष्ट किया है कि: सत्य आचरण, संयमित जीवन एवं परमात्मा का अनन्य ध्यान।

कठिनाई: hard