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श्री शब्द वाणी का पावन पद 101 ('शब्द 101: नितही मावस नित संकरांति') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 101 (शब्द 101: नितही मावस नित संकरांति) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-नितही मावस नित संकरांति, नितही नवग्रह वैसैं पांति। नितह...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 102 ('शब्द 102: विष्णु विष्णु भण अजर जरीजै,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 102 (शब्द 102: विष्णु विष्णु भण अजर जरीजै,) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-विष्णु विष्णु भण अजर जरीजै, धर्म हुवै पापां छूटीजै। हरि...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 103 ('शब्द 103: देखि अदेख्या') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 103 (शब्द 103: देखि अदेख्या) विशुद्ध रूप से Raag Dhanasri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-देखि अदेख्या, सुण्या असुण्या, क्षिमारूप तप कीजै। थोड़े म...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 104 ('शब्द 104: कंचन दांनू कछु न मानूं,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 104 (शब्द 104: कंचन दांनू कछु न मानूं,) विशुद्ध रूप से Raag Maru में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-कंचन दांनू कछु न मानूं, कापड़ दानू कछु न मांनू। चोपड़ दान...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 105 ('शब्द 105: आप अलेख उपन्ना शंभू') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 105 (शब्द 105: आप अलेख उपन्ना शंभू) विशुद्ध रूप से Raag Sarang में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-आप अलेख उपन्ना शंभू, निरह निरंजन धंधू कारूं। आपै आप हुआ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 106 ('शब्द 106: सुंणरे काजी सुंणरे मुल्ला') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 106 (शब्द 106: सुंणरे काजी सुंणरे मुल्ला) विशुद्ध रूप से Raag Kalyan में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-सुंणरे काजी सुंणरे मुल्ला सुणियो लोग लुगाई। नर निरहारी ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 107 ('शब्द 107: सहजे शीले सेज बिछायों') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 107 (शब्द 107: सहजे शीले सेज बिछायों) विशुद्ध रूप से Raag Kedara में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-सहजे शीले सेज बिछायों, उनमन रह्या उदांसू। जुगे जुगन्तर ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 108 ('शब्द 108: हालीलो भल पालीलो सिध पालीलो') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 108 (शब्द 108: हालीलो भल पालीलो सिध पालीलो) विशुद्ध रूप से Raag Todi में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-हालीलो भल पालीलो सिध पालीलो, खेड़त सूना राणो। चन्हद सूर ...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 109 ('शब्द 109: देखत भूली को मनमानै') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 109 (शब्द 109: देखत भूली को मनमानै) विशुद्ध रूप से Raag Ramkali में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-देखत भूली को मनमानै, सेवै बिलोवै बाझ सनानै। देखत भूली क...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 110 ('शब्द 110: मथुरा नगर की राणी होती,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 110 (शब्द 110: मथुरा नगर की राणी होती,) विशुद्ध रूप से Raag Bhairav में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-मथुरा नगर की राणी होती, होती पाटमदे राणी। तीरथ वासी जात...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 111 ('शब्द 111: खरड़ ओढ़ीजै') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 111 (शब्द 111: खरड़ ओढ़ीजै) विशुद्ध रूप से Raag Asavari में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-खरड़ ओढ़ीजै, तूंबा जीमीजैं, सुरहै दुहीजै, कृत खेत की सींव...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 112 ('शब्द 112: जांके पंथ का भांजणा') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 112 (शब्द 112: जांके पंथ का भांजणा) विशुद्ध रूप से Raag Sorath में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-जांके पंथ का भांजणा, गुरू का नींदणा। स्वामी का दुस्मणा,...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 113 ('शब्द 113: ईमा मोमण चीमा गोयम') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 113 (शब्द 113: ईमा मोमण चीमा गोयम) विशुद्ध रूप से Raag Gauri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-ईमा मोमण चीमा गोयम, महंमद फुरमानी। उरका फुरका निवाज फरी...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 114 ('शब्द 114: सुरनर तणो सन्हदेसो आयो') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 114 (शब्द 114: सुरनर तणो सन्हदेसो आयो) विशुद्ध रूप से Raag Bilawal में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-सुरनर तणो सन्हदेसो आयो, सांभलीयो रे जाटो। चांदणै थकै अं...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 115 ('शब्द 115: म्हे आप गरीबी तन गूदड़ियों,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 115 (शब्द 115: म्हे आप गरीबी तन गूदड़ियों,) विशुद्ध रूप से Raag Dhanasri में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-म्हे आप गरीबी तन गूदड़ियों, मेरा कारण किरिया देखो। बिन्द...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 116 ('शब्द 116: आयसां मृगछाला पावोडी कांय फिरावो,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 116 (शब्द 116: आयसां मृगछाला पावोडी कांय फिरावो,) विशुद्ध रूप से Raag Maru में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-आयसां मृगछाला पावोडी कांय फिरावो, मतूंत आयसां ऊगंतो भां...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 117 ('शब्द 117: टूका पाया मगर मचाया') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 117 (शब्द 117: टूका पाया मगर मचाया) विशुद्ध रूप से Raag Sarang में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-टूका पाया मगर मचाया, यूं हंडियाया कुत्ता। जोग जुगत की स...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 118 ('शब्द 118: सुरगा हूंते शम्भू आयो') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 118 (शब्द 118: सुरगा हूंते शम्भू आयो) विशुद्ध रूप से Raag Kalyan में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-सुरगा हूंते शम्भू आयो, कहो कूंणा के काजै। नर निरहारी एक...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 119 ('शब्द 119: विष्णु विष्णु तू भणरे प्राणी,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 119 (शब्द 119: विष्णु विष्णु तू भणरे प्राणी,) विशुद्ध रूप से Raag Kedara में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-विष्णु विष्णु तू भणरे प्राणी, पैंके लाख उपाजूं। रतन काय...'
श्री शब्द वाणी का पावन पद 120 ('शब्द 120: विष्णु विष्णु तू भणरे प्राणीं,') किस शास्त्रीय राग में निबद्ध है?
श्री शब्द वाणी का पद संख्या 120 (शब्द 120: विष्णु विष्णु तू भणरे प्राणीं,) विशुद्ध रूप से Raag Todi में संकलित है। मूल आरंभिक पंक्ति: 'ओ३म्-विष्णु विष्णु तू भणरे प्राणीं, इस जीवन कै हावै। क्षण क्...'